शैक्षिक पाठयक्रम

महाविधालय में पंचमुखी शिक्षा

महाविधालय मे सर्वांग सम्पूर्ण शिक्षा की दृष्टि से पंचमुखी शिक्षा का आयोजन किया गया है । जो शिक्षा के शारीरिक, व्यवहारिक , शैक्षिक, बौद्धिक एंड नैतिक पांच पक्षों में समन्वय करने का प्रयत्न करती हे । महाविधालय का लक्षय पूर्व और पच्चिम की आध्यात्मिक विरासत एवं समकालीन उपलब्धियों के समन्वय के सन्दर्भ में शिक्षण- प्रशिक्षण का प्रावधान करना तथा छात्रों के मानस में भारतीय जीवन शैली एवं संस्कृत तथा भारतीय संस्कृति के आधारभूत मूल्यों और आदर्शो को स्थापित करना और उनको संजोय रखना है ।

मध्यमा :

मध्यमा का पाठ्यक्रम चार वर्ष मै सपन्न होगा । दो वर्ष मे पूर्व मध्यमा तथा दो वर्ष में उत्तर मध्यमा के प्रथम और द्वितीय वर्ष में सात सात पत्र होगे और पूर्व मध्यमा में छः- छः पत्र होगे ।

अनिवार्य विषय :

संस्कृत और हिंदी ।

वैकल्पिक विषय -क वर्ग :

(कोई एक विषय लेना है ) नव्य वयाकरण, प्राचीन वयाकरण, साहित्य दर्शन, पुराणेतिहास, ज्योतिष ।

वैकल्पिक विषय -ख वर्ग :

(कोई एक विषय लेना है ) नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास,पुराणेतिहास एवं संस्कृति, भूगोल, गणित, विज्ञानं, पाली, प्राकृत, नेपाली, तुलनात्मक दर्शन,हिंदी,समाज शास्त्र, संगीत, गृह विज्ञानं (केवल बालिकाओ के लिये)

ऐछिक अतिरिक्त विषय :

अंग्रेजी

शास्त्री :

यह पाठ्यक्रम तीन वर्षो में सम्पन होगा ।

अनिवार्य विषय :

संस्कृत और हिंदी ।

वैकल्पिक विषय -क वर्ग :

वैकल्पिक विषय- क वर्ग: (कोई एक विषय लेना है ) नव्य वयाकरण, प्राचीन व्याकरण, साहित्य,दर्शन, ज्योतिष, पुराणेतिहास ।

वैकल्पिक विषय ख वर्ग: :

(कोई एक विषय लेना है ) राजशास्त्र, अर्थ शास्त्र, इतिहास, प्राचीन भारतीयइतिहास संस्कृति,भूगोल, नेपाली, हिंदी, पाली,प्राकृत, राजशास्त्रदर्शन भाषा विज्ञानं गृह विज्ञानं (केवल बालिकाओ के लिये )

ऐछिक अतिरिक्त विषय :

अंग्रेजी और पर्यावरण अध्यन ।

आचार्य :

यह पाठ्यक्रम दो वर्षो में सम्पन होगा और निम्न छः विषयो में से किसी एक में किया जायगा ।

वैकल्पिक विषय -क वर्ग :

वैकल्पिक विषय- क वर्ग: (कोई एक विषय लेना है ) नव्य वयाकरण, प्राचीन व्याकरण, साहित्य,दर्शन, ज्योतिष, पुराणेतिहास ।

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