हमारे बारे में

संस्थापकक महंत श्री बलराम साधु

महंत बलराम जी का जन्म विक्रमी संवत १९४० कार्तिक मास में रवा राजपूत वंश में शाहदरा (दिल्ली) में हुआ । उस समय आपके परिवार से सम्बद्ध कुछ लोग ग्वालीखेड़ा में रहते थे । आप भी अपनी माता जी के साथ अल्पायु में ही ग्वालीखेड़ा आ गए थे और यही रहने लगे थे । उस समय दादु स्थल आश्रम ग्वालीखेड़ा के महंत स्वामी भगवान दास जी थे । वे विद्वान थे और चिकित्सा में प्रवीण थे ।


उन के शिष्य स्वामी तोता राम जी थे तोता राम जी से आपकी भेंट हुई । उन्होंने आपको अपना शिष्य बनाने के लिए आपकी माता जी से आग्रह किया और फिर आपकी माता जी ने आपको उन्हे शिष्ये के रूप मे समर्पित कर दिया कुछ समय पश्चात आपके गुरु जी ने आपकी बौद्धिक कुशलता को देखकर आपको पढ़ने के लिए ग्राम जुआं (हरियाणा) में भेज दिया । वहाँ आपने व्याकरण आदि का अध्यन किया । फिर वहाँ से व्याकरण के गरन्थो का गहन अध्यन और वैदस्य करके लोटे ।


इस के बाद जयपुर राजस्थान में आयुर्वैद मार्तण्ड दादुपंथी स्वामी लक्ष्मी राम जी के शिष्ये से आयुर्वैद का अध्यन किया । आप आयुर्वैद के अच्छे ज्ञाता हो गए । बागपत क्षेत्रे में आपका खूब यश फ़ैल गया । लोग आप को धन्वन्तरि की संज्ञा देने लगे । उस समय यहाँ शिक्षा का आभाव था । स्वामी जी ने सब देखा और विचार किया । जिससे राष्ट्र का भी कल्याण हों ।


इस प्रकार के विचारो का मंथन करके उन्होंने संस्कृत पाठशाला खोलने का निश्च्य निस्चय किया । पाठशाला खोलने के लिए उन्होने पांच बीघा जमीन खरीदी और जुलाई १९५३ ईस्वी में संस्कृत पाठशाला की नीव रख दी । इस प्रकार उन्होंने पाठशाला खोलकर इस क्षेत्र का उद्धार किया ।

त्यागमूर्ति महंत बलराम जी ने चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में जनता का उपकार किया । १७ नवंबर १९८१ में उनका स्वर्गवास हुआ । आज भी लोग उन्हे याद करते हे ।


आज उनके द्वारा संस्कृत विद्यालय के रूप में लगाया गया यह पौधा उत्तरोत्तर पल्वित और पुष्पित बलराम जी के शिष्ये महंत डॉ साधुराम जी के सफल निर्देशन में दिन दूनी रात चौगुनी तरक़्क़ी कर रहा है । अब यह संस्कृत और भारतीय संस्कृति का बहुत बड़ा केंद्र बन चूका है । यह सब श्री दादू बलराम संस्कृत महाविद्यालय के रूप में विख्यात सम्पूर्णानंद संस्कृत विशवः विद्यालय वाराणसी से आचार्य पर्यन्त छ: विषयो में मान्यता प्राप्त है और विशवः विद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली से सम्बद्ध है । वर्तमान में ये संस्था (इन्कम टैक्स ) मुफ्त भी है ।

ग्वालीखेड़ा बागपत

बागपत जनपत की बागपत तहसील में बागपत से लगभग १५ कि.मी. दूर ग्वालीखेड़ा एक प्राचीन गॉव है । यह गाव मेरठ, दिल्ली, बड़ौत तथा अन्ये शेहरो से रेल तथा बसो के द्वारा जुड़ा है । बाग़पत रोड स्टेशन (टटीरी) उतर कर बस द्वारा वाया मित्तली, बसौद, बिलोचपुरा ग्वालीखेड़ा पंहुचा जा सकता है । अमीनगर सराय से भी बस द्वारा विद्यालय भवन पंहुचा जा सकता है । विद्यालय भवन के सामने ही बस स्टैंड है और बसो की सर्विस आधा घंटे की है।

श्री दादू बलराम संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ग्वालीखेड़ा- बागपत

यह विद्यालय महामनीषी आयुर्वैद शास्त्र प्रत्यक्ष प्रमाणज्ञ बलराम जी ने सं १९५३ में दादु जी महाराज की पवित्र स्थली गाव ग्वालीखेड़ा में स्थापित किया । यह स्थल अब पूर्ण तीर्थ की संज्ञा प्राप्त कर गया है । दूर दूर से दर्शनार्थी यहाँ आकर स्वयं को धन्य समझते है । इस तीर्थ स्थल पर संस्कृत और भारतीय संस्कृति का अनोखा संगम देखा जा सकता है | इस महाविद्यालय में प्रायः निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है ।

महंत डॉ साधु राम जी स्वामी वर्तमान समय मे इस महा विध्यालय के प्राचार्य है | इन के निर्देशन में यह दिन दोगुनी दुगनी रात चौगुनी तरक़्क़ी कर रहा है । उत्तर प्रदेश में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारत में यह अपनी कीर्ति पताका फहराता हुआ संस्कृत जगत में विशेष स्थान प्राप्त कर चुका है । आज सभी संस्कृत महा विध्यालय शिक्षा संस्कार और संख्या की दृष्टि अग्रगण्य है ।

यह महाविद्यालय उत्तर मध्य मा तक उत्तर पदेश संस्कृत माध्यमिक शिक्षा परिसद(बोर्ड ) लखनऊ तथा शास्त्री एवं आचार्य पर्यन्त श्री सम्पूर्णानन्द संस्कृत विशवः विद्यालय वाराणसी से मान्यता प्राप्त है । यहाँ यधपि आधुनिक विषय भी पढ़ाये जाते है ।लेकिन विशेष रूप से भारतीय पुरातन शिक्षा पद्धिति का ध्यान रखा जाता है । यहाँ अध्यन अध्यापन के साथ साथ बौद्धिक शारीरिक नैतिक एवं आध्यत्मिक शिक्षा पर भी बल दिया जाता है । यहाँ चरित्र निर्माण हेतु सदाचार की शिक्षा दी जाती है । क्योकि मानव निर्माण में उपदेश एव सदाचार की अहम भूमिका होती है । यहाँ ब्रह्मचर्या वर्त पर विशेष बल दिया जाता है ।

यह महाविद्यालय ग्रामीण अंचल में टटीरी धनौरा रोड पर ग्राम के बाहर पश्चिम में स्थित है । जिस कारण यहाँ का वातावरण अत्यंत शुद्ध है । पवित्रता यहाँ के आँचल में छुपी है । यहाँ की भूमि उर्वरा है । महाविद्यालय के निकट खेती होती है, इसलिये सदैव हरियाली रहती है । जब जल पूर्ण खेतो से वायु आती है तो महाविद्यालय के वातावरण को शीतल एवं सुगन्धित कर देती है । इस प्रकार यह संस्था अपने आप मे अनूठी है, जिस में गरीब परिवारो से सम्बंद छात्र भी अध्यन कर सकते है ।

सम्प्रति महंत डॉ साधु राम जी स्वामी इस संस्था के प्राचार्य एवं मुखिया है जो स्वय एक सरल स्वभाव के संत है | जिनका ध्येय परोपकार हे, जो सदैव जनकल्याण में लीन रहते है । इस क्षेत्र का उद्दार करना ही उनका लक्ष्य है ।

पूछताछ

Name
Contact No.
E-Mail Id
Description